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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3

    धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

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    10/11/2022
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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 3
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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2

    धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 2
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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1

    धरती पर जितने भी प्राणी हैं सब की रोज़ी का जिम्मेदार सर्वशक्तिमान अल्लाह है, और उस ने प्रत्येक व्यक्ति की एक नियमित जीविका लिख रखी है जिसे प्राप्त किए बिना वह नहीं मरेगा। तथा अल्लाह तआला ने रोज़ी कमाने के असबाब (कारण, उपाय) भी मुक़द्दर कर दिये हैं जिन को रोज़ी की प्राप्ति के लिए अपनान आवश्यक है। किन्तु मनुष्य चूँकि जल्दवाज़ पैदा किया गया है और उसके अंदर कंजूसी और धन का प्यार रख दिया गया है, इसलिए वह अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाता और रोज़ी कमाने के लिए सब से से आसान और संछिप्त उपाय और तरीक़ा तलाश करता है और हलाल और हराम की कोई परवाह नहीं करता है। इस तरह आदमी हराम कमाई और हराम खोरी में लग जाता है।

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    हराम कमाई और उस पर चेतावनी 1
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    दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यक्ता

    दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यक्ता

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    10/11/2022
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    दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यक्ता
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    रोज़े की रक्षा

    रोज़े की रक्षाः रोज़ा मात्र खाना पानी छोड़ देने, या कुछ रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से रुक जाने का नाम नहीं है। बल्कि वास्तविक रोज़ा गुनाहों से रुक जाने, उनसे दूर रहने का नाम है। प्रस्तुत व्याख्यान में, इस पवित्र महीने में गुनाहों में पड़ने से चेतावनी देते हुए, झूठ, हराम (निषिद्ध) चीज़ों को देखने, सुनने, बोलने और करने से रोज़े को सुरक्षित रखने पर ज़ोर दिया गया है। विशेषकर पाँच समय की दैनिक नमाज़ों मे कोताही व लापरवाही करने से सावधान किया गया है, जिसके बारे में शरीअत में कड़ी चेतावनी आई है। इसी तरह, रोज़े के अलावा रमज़ान के महीने में अन्य एच्छिक कार्यों जैसे- तरावीह की नमाज़, क़ियामुल्लैल और अधिक से अधिक क़ुरआन करीम का पाठ करने का उल्लेख किया गया है।

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    10/11/2022
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    रोज़े की रक्षा
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    रमज़ान के अंतिम दस दिनों की फज़ीलत

    रमज़ान के अंतिम दस दिनों की फज़ीलतः इस उम्मत पर अल्लाह का बहुत बड़ा उपकार है कि उसने उन्हें रमज़ान के अंतिम दस दिनों में एक ऐसी रात प्रदान किया है, जो हज़ार महीनों (अर्थात 83 वर्षों) से अधिक बेहतर है। इसीलिए इस रात को पाने के लिए पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एतिकाफ़ करते थे और नेकी के कार्यों में बहुत संघर्ष करते थे, रातों को जागते थे और अपने परिवार को भप जगाते थे। प्रस्तुत व्याख्यान में इसी पर चर्चा किया गया है।

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    हज्ज का संक्षिप्त विवरण

    हज्ज का संक्षिप्त विवरण : हज्ज एक महान वैश्विक अवसर है, जिसमें दुनिया के कोने-कोने से आकर मुसलमान अल्लाह के पवित्र घर मक्का मकर्रमा में एकत्रित होते हैं ; ताकि उस महान कर्तव्य को पूरा करें जो जीवन में केवल एक बार अनिवार्य है। प्रस्तुत व्याख्यान में हज्ज की अनिवार्यता, उसकी फज़ीलत, इस यात्रा के लिए हलाल धन की आपूर्ति, तथा इसे खालिस अल्लाह के लिए और उसके पैगंबर के बताए हुए तरीक़े के अनुसार अदा करने का उल्लेख है। इसी हज्ज के निर्धारित स्थानों (मीक़ात), एहराम बांधने के समय ऐच्छिक चीज़ों, एहराम की अवस्था में वर्जित और निषिद्ध चीज़ों और संक्षेप के साथ उम्रा और हज्ज की विधि का उल्लेख किया गया है।

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    10/11/2022
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    पंद्रह शाबान की हक़ीक़त

    वर्तमान समय में कुछ मुसलमानों के बीच प्रचलित बिदअतों में से एक घृणित बिदअत : पंद्रह शाबान की रात का जश्न मनाना है, जिसे अवाम में शबे-बराअत के नाम से जाना जाता है और उसमें अनेक प्रकार की शरीअत के विरुद्ध कार्य किए जाते हैं, जिनके लिए ज़ईफ़ और मनगढ़त हदीसों का सहारा लिया जाता है। इस आडियो में पंद्रह शाबान की रात के बारे में वर्णित हदीसों का चर्चा करते हुए, उनकी हक़ीक़त से पर्दा उठाया गया है।

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    पंद्रह शाबान की हक़ीक़त
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    चाँद और नीयत के मसाइल

    प्रस्तुत आडियो में रमज़ान के महीने की महान घड़ियों और क्षणों से भरपूर लाभ उठाने पर बल देते हुए, रमज़ान के महीने की शुरूआत और उसके प्रवेष करने के सबूत का वर्णन किया गया है, और यह स्पष्ट किया गया कि रमज़ान के महीने के आरंभ होने की प्रामाणिकता रमज़ान का चाँद देखने या उसके देखे जाने पर एक विश्वस्त आदमी की गवाही का होना, और यदि किसी कारण चाँद न दिखाई दे तो शाबान के तीस दिन पूरे करना है। तथा रमज़ान से पहले उसके अभिवादन के तौर पर एक दो दिन रोज़ा रखना धर्मसंगत नही है। इसी तरह इसमें नीयत की अनिवार्यता, नीयत का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए यह उल्लेख किया गया है कि नीयत ज़ुबान से करना धर्मसंगत नही है।

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    चाँद और नीयत के मसाइल
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    हज्ज और उम्रा के फज़ायल

    हज्ज और उम्रा के फज़ायल : प्रस्तुत व्याख्यान में हज्ज की अनिवार्यता, इस्लाम धर्म में उसके महत्व का उल्लेख करते हुए, दिव्य क़ुरआन और हदीस में हज्ज और उम्रा तथा उनके विभिन्न कार्यों के गुणविशेषण व प्रतिष्ठा का वर्णन किया गया है।

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    हज्ज और उम्रा के फज़ायल
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