आमिना ने अपने पति अब्दुल्लाह को याद किया, और अपने बेटे मुहम्मद के साथ उनकी क़ब्र की ज़ियारत करने का इरादा किया। चुनाँचे उन्हों ने यसरिब (मदीना मुनव्वरा) की ओर यात्रा की, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दादा के ननिहाल बनू नज्जार के पास नाबिग़ा के घर पर उतरीं, और वहाँ एक महीना ठहरीं। जब यहूदियों ने मुहम्मद को देखा, तो उन्हों ने पहचान लिया कि आप इस उम्मत के नबी हैं, और कहा : यह इस उम्मत के नबी हैं और यसरिब ही वह नगरी है जिसकी ओर वह हिजरत करेंगे। तो आमिना को आपके ऊपर डर महसूस हुआ। अत: वह आपको लेकर वापस लौटीं, उनके साथ उम्मे ऐमन भी थीं, और इन्हों ने ही आमिना को यहूद जो कुछ कहते थे उसके बारे में सूचना दी थी। मक्का आते हुए रास्ते में आमिना बीमार हो गर्इं, और वहीं उनकी मृत्यु हो गर्इ, और अबवा नामी स्थान पर दफन कर दी गर्इं। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दाया उम्म ऐमन आपको लेकर मक्का आयीं और आप अपने दादा अब्दुल मुत्तलिब की किफालत (देखरेख) में आगए।
सीना चाक किए जाने की घटना के बाद, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बनू सअद में अधिक दिन तक नहीं ठहरे, बल्कि अपनी माँ आमिना के पास लौट आए, ताकि उनके प्यार से लाभान्वित हों, तथा वह आपके अनाथपन की छतिपूर्ति करने की कोशिश करती थीं।
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